डेटा सोर्सिंग
सही और मूल्यवान डेटासेट बनाने के लिए कई स्रोतों की मदद से जानकारी को पहचानने, जुटाने और एक साथ जोड़ने के व्यवस्थित तरीके को डेटा सोर्सिंग कहा जाता है। यह कारोबारी संगठनों को सबूत पर आधारित फ़ैसले लेने में और B2B कॉन्टैक्ट हासिल करने, मार्केटिंग तथा एनालिटिक्स को आसान बनाने में मदद करता है।
डेटा सोर्सिंग क्या है?
डेटा सोर्सिंग एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें कई सिस्टम या थर्ड-पार्टी जानकारी को हासिल करना और उस डेटा को व्यवस्थित करना शामिल है। इससे कंपनियां ग्राहक प्रोफ़ाइल, ग्राहक व्यवहार या फ़र्मोग्राफ़िक्स से जुड़ी काम की जानकारी जुटा पाती हैं।
डेटा का असरदार स्रोत अच्छी क्वालिटी के प्रोफ़ाइल डेटासेट बनाने में मदद करता है, जिससे मार्केटिंग की सटीकता और कामकाज की असरदारी बढ़ती है। डेटा सोर्सिंग में कंपनियों का ध्यान भरोसेमंद स्रोतों से जानकारी खोजने, चुनने, पहचानने, उसकी प्रामाणिकता जांचने और उसे समाहित करने पर रहता है। यह एक लगातार चलने वाला मैकेनिज़्म है, जो सभी डेटासेट को अप-टू-डेट और सही फ़ॉर्मैट में बनाए रखता है।
डेटा सोर्सिंग के प्रकार
इसकी दो बड़ी श्रेणियां हैं: आंतरिक और बाहरी डेटा सोर्सिंग। आंतरिक डेटा के स्रोतों में CRM सिस्टम या यूज़र इंटरैक्शन शामिल हैं, जबकि बाहरी स्रोतों में सार्वजनिक रिकॉर्ड या वेंडर आते हैं। फ़ैसले लेने के लिए एक अच्छी डेटा सोर्सिंग रणनीति इन दोनों को, कॉन्टैक्ट एनरिचमेंट और टेक्नोग्राफ़िक इनसाइट को मिलाकर इस्तेमाल करती है।
असरदार डेटा सोर्सिंग के लिए टिप्स
कारोबार में असरदार डेटा सोर्सिंग के लिए वैध स्रोतों का उपयोग, पार्टी रिकॉर्ड की पुष्टि और डेटा गोपनीयता का शामिल होना अनिवार्य है। भरोसा टूटने से बचने के लिए हमेशा GDPR जैसी अनुपालन-आधारित नीतियों को इसके साथ मिलाएं। सटीकता बढ़ाने के लिए कारोबार में सिग्नल इंटीग्रेशन, डेटा एग्रीगेशन और डेटा वैलिडेशन सॉफ़्टवेयर को भी शामिल करना चाहिए।
डेटा सोर्सिंग के उदाहरण
डेटा सोर्सिंग के उदाहरणों में CRM सिस्टम से ग्राहक की जानकारी निकालना, सोशल नेटवर्क में फ़र्मोग्राफ़िक जानकारी जुटाना, या डुप्लिकेट हटाने के लिए एंटिटी रिज़ॉल्यूशन सिस्टम को बदलना शामिल हैं। डेटा सोर्सिंग की ऐसी तकनीकें कंपनी की टीमों को पूरे कामकाज में सटीक, भरोसेमंद और काम में लाने लायक जानकारी बनाए रखने में मदद करती हैं।
