रैपर
रैपर क्या है?
रैपर एक सरल परत है, जो कोड या मार्कअप को घेरती है, ताकि काम ज़्यादा आसान हो जाएं और नतीजे ज़्यादा एक जैसे रहें। सॉफ़्टवेयर में यह अक्सर तकनीकी जानकारी छिपा देता है, डिज़ाइन में यह लेआउट व्यवस्थित करने में मदद करता है। डेवलपर अक्सर रैपर फ़ंक्शन इसलिए लिखते हैं, ताकि आम काम संभाले जा सकें, एरर की संख्या कम हो या एक ही नियम कई जगह लागू किया जा सके। वेब प्रोजेक्ट में रैपर का इस्तेमाल वेब पेज पर कंटेंट व्यवस्थित करने के लिए कंटेनर के तौर पर भी किया जा सकता है।
डेटाबेस तक पहुंच के लिए रैपर
अलग-अलग डेटाबेस अलग-अलग ड्राइवर और नियम इस्तेमाल करते हैं। रैपर एक स्थिर इंटरफ़ेस सामने रखकर इसे एक जैसा बना देता है। हर सिस्टम की बारीकियां सीखने के बजाय डेवलपर कॉल रैपर के ज़रिए भेज सकते हैं, जो कनेक्शन संभालता है। रैपर फ़ंक्शन क्वेरी लिखने का झंझट कम कर देता है और टेस्ट को अनुमान लगाने लायक बनाए रखता है। ज़्यादा बड़े सिस्टम में ये मॉनिटरिंग के लिए एक ही जगह देते हैं और एप्लिकेशन तथा वेबसाइट को भरोसेमंद बनाए रखते हैं।
ऑब्जेक्ट-ओरिएंटेड प्रोग्रामिंग
ऑब्जेक्ट-ओरिएंटेड प्रोग्रामिंग में रैपर एक ऑब्जेक्ट को इस तरह ढाल देता है कि वह दूसरे ऑब्जेक्ट के इंटरफ़ेस से मेल खा सके। यह तकनीक लाइब्रेरी का दोबारा इस्तेमाल और ज़्यादा आसान इंटीग्रेशन संभव बनाती है। रैपर नए मेथड जोड़ सकता है, क्लास का विस्तार कर सकता है या ऐसे कंटेनर बना सकता है, जो मुख्य हिस्सों को दोबारा लिखे बिना कोड के एलिमेंट को एक साथ ले आएं।
HTML के लिए रैपर
HTML डॉक्यूमेंट में लोग आम तौर पर रैपर के तौर पर div का इस्तेमाल करते हैं। यह कंटेंट, इमेज या मीडिया को एक समूह में रखता है और CSS नियम लागू करता है। इस तकनीक से सेक्शन व्यवस्थित करके डेवलपर HTML फ़ाइल का स्ट्रक्चर तैयार कर सकते हैं, CSS क्लास लागू कर सकते हैं और लेआउट बनाए रख सकते हैं। वेब डिज़ाइन में रैपर आज भी ज़रूरी हैं और समय के साथ स्केलेबल तथा रिस्पॉन्सिव वेब पेज को सपोर्ट करते हैं।
