स्ट्रक्चर्ड डेटा
आज के डिजिटल दौर में किसी भी कारोबार या तकनीकी सेवा की सफलता काफ़ी हद तक डेटा पर निर्भर करती है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हर तरह का डेटा उपयोगी होता है। तेज़ और साथ ही सही विश्लेषण करने में सिर्फ़ स्ट्रक्चर्ड डेटा ही मदद कर सकता है। वजह साफ़ है: यह अच्छी तरह व्यवस्थित होता है। आइए इसका सही मतलब और अहमियत जानते हैं।
स्ट्रक्चर्ड डेटा क्या है?
स्ट्रक्चर्ड डेटा की परिभाषा यह है — यह ऐसा डेटा है जो पहले से तय फ़ॉर्मैट में व्यवस्थित होता है। आम तौर पर इसे पंक्तियों और कॉलम में स्टोर किया जाता है, ताकि मशीन या कंप्यूटर इसे आसानी से समझ सकें। स्ट्रक्चर्ड डेटा का मकसद खोज, विश्लेषण और फ़िल्टरिंग की प्रक्रियाओं को आसान बनाना है। यह कई स्कीमा प्रकारों या मॉडलों में से किसी एक का पालन करता है। स्कीमा और कुछ नहीं, बल्कि एक ऐसा फ़ॉर्मैट है जो यह तय करता है कि पंक्तियां और कॉलम किस तरह व्यवस्थित होंगे।
स्ट्रक्चर्ड डेटा कैसे काम करता है?
स्ट्रक्चर्ड डेटा सारे कंटेंट को एक तय फ़ॉर्मैट में व्यवस्थित करता है। यह फ़ॉर्मैट स्कीमा से तय होता है। इससे आख़िरकार डेटा को स्टोर करना और प्रोसेस करना बिना किसी झंझट के हो जाता है। उदाहरण के लिए, डेटा की स्ट्रक्चर्ड फ़ॉर्मैटिंग से विश्लेषण टूल को जानकारी आसानी से समझने में मदद मिलती है। डेटा को पंक्तियों और कॉलम में व्यवस्थित करने के अलावा, उसे टैग और लेबल भी दिए जाते हैं। इस तरह डेटाबेस मैनेजमेंट की जटिलता खत्म हो जाती है।
डेटा को स्ट्रक्चर्ड बनाने की प्रक्रिया में हर डेटा पॉइंट को लेबल के साथ टैग करना शामिल है। इस तरह डेटाबेस मैनेजमेंट आसान हो जाता है।
स्ट्रक्चर्ड डेटा बनाम अनस्ट्रक्चर्ड डेटा: अंतर
स्ट्रक्चर्ड डेटा अच्छी तरह व्यवस्थित होता है और सख़्त फ़ॉर्मैट का पालन करता है। दूसरी ओर, अनस्ट्रक्चर्ड डेटा का कोई निश्चित ढांचा नहीं होता। साथ ही, उसके डेटा में इमेज और वीडियो भी हो सकते हैं। एक और प्रकार भी होता है, यानी सेमी-स्ट्रक्चर्ड डेटा। इसमें टैग और मेटाडेटा शामिल होते हैं, लेकिन यह किसी निश्चित स्कीमा का पालन नहीं करता। इसलिए स्ट्रक्चर्ड डेटा और सेमी-स्ट्रक्चर्ड डेटा के बीच अंतर है।
स्ट्रक्चर्ड डेटा के यूज़ केस
स्ट्रक्चर्ड डेटा कई कामों में इस्तेमाल होता है। सबसे पहले, डेटा वेयरहाउस बड़े डेटासेट को मैनेज करने के लिए इसका उपयोग करते हैं। इसके अलावा, कारोबार इसका इस्तेमाल विश्लेषण और अहम फ़ैसले लेने के लिए करते हैं। इतना ही नहीं, फ़ाइनेंस और रिटेल जैसे दूसरे क्षेत्र भी सटीक गणना के लिए स्ट्रक्चर्ड डेटा पर बहुत ज़्यादा निर्भर हैं। यह Google और Bing जैसे सर्च इंजन को वेबसाइट का कंटेंट साफ़ तौर पर समझने में भी मदद करता है। जानकारी को व्यवस्थित करना आसान काम बन जाता है, जिससे आख़िरकार प्रोसेस करने में कम मेहनत लगती है।
उदाहरण
किसी CRM में अस्पताल के मरीज़ों के रिकॉर्ड या बैंक के ग्राहकों के रिकॉर्ड स्ट्रक्चर्ड डेटा होते हैं। ऐसा डेटा स्टोर करने के लिए SQL डेटाबेस का इस्तेमाल होता है। स्ट्रक्चर्ड डेटा का मतलब आसानी से समझा जा सकता है। आम तौर पर इसमें नाम, कीमत और ID वाली टेबल होती हैं। ऐसे फ़ॉर्मैट से ग्राहकों को बेहतर सेवाएं देना संभव हो जाता है।
